मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना 2026 (अब मंगला पशु बीमा योजना) – निःशुल्क बीमा व सम्पूर्ण जानकारी

मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना 2026

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परिचय – मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना क्या है?

राजस्थान के किसान परिवार के लिए गाय-भैंस सिर्फ पशु नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका का आधार होते हैं। जब बीमारी या दुर्घटना में इनकी असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो पशुपालक परिवार की पूरी आर्थिक व्यवस्था चरमरा जाती है। इसी संकट से पशुपालकों को बचाने के लिए राजस्थान सरकार ने वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना शुरू की थी।

2023 में शुरू हुई इस योजना के तहत महंगाई राहत कैंप के दौरान पशुपालकों के 2 दुधारू पशुओं (गाय/भैंस) का निःशुल्क बीमा किया गया था। वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में राज्य सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसे नया नाम दिया मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना। अब इस विस्तारित योजना के तहत दुधारू गाय-भैंस के साथ-साथ भेड़, बकरी और ऊंट को भी बीमा कवरेज में शामिल किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में इस योजना का दायरा और भी बड़ा किया गया। अब कुल 42 लाख पशुओं को बीमा कवरेज देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 10-10 लाख गाय, भैंस, भेड़, बकरी और 2 लाख ऊंट शामिल हैं। यह राजस्थान सरकारी योजनाएं में पशुपालन क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी बीमा योजना है।

महत्वपूर्ण: यदि आप ‘कामधेनु पशु बीमा योजना’ खोज रहे हैं तो ध्यान दें। यह योजना अब मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के नाम से बड़े दायरे के साथ चल रही है। पुरानी योजना के तहत बीमित पशुओं का क्लेम अब भी संबंधित बीमा कंपनी और पशुपालन विभाग के माध्यम से लिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना 2026 (अब मंगला पशु बीमा योजना) – निःशुल्क बीमा व सम्पूर्ण जानकारी
मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना 2026 (अब मंगला पशु बीमा योजना) – निःशुल्क बीमा व सम्पूर्ण जानकारी

Key Highlights – एक नज़र में योजना (कामधेनु → मंगला)

विवरण जानकारी
मूल योजना का नाम मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना
आरंभ (कामधेनु) वर्ष 2023
वर्तमान/विस्तारित नाम मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना
विस्तार वर्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 (बजट बिंदु संख्या-132)
नोडल विभाग पशुपालन विभाग, राजस्थान
लाभार्थी राजस्थान के सभी जन आधार कार्ड धारक पशुपालक
पात्र पशु दुधारू गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट
अधिकतम बीमा राशि (गाय/भैंस/ऊंट) ₹40,000 प्रति पशु
बीमा शुल्क पूर्णतः निःशुल्क (सरकार वहन करती है)
2024-25 लक्ष्य 5-5 लाख गाय/भैंस + 5-5 लाख भेड़/बकरी + 1 लाख ऊंट
2025-26 लक्ष्य (विस्तारित) 10-10 लाख गाय/भैंस/भेड़/बकरी + 2 लाख ऊंट = 42 लाख पशु
2025-26 कुल बजट ₹400 करोड़ (प्रस्तावित)
आधिकारिक पोर्टल mmpby.rajasthan.gov.in
हेल्पलाइन 181 (Sampark)

योजना का उद्देश्य

राजस्थान एक कृषि प्रधान राज्य है जहां लाखों परिवारों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है। दुधारू पशुओं की अचानक मृत्यु चाहे बीमारी से हो, दुर्घटना से हो या प्राकृतिक आपदा से पशुपालक परिवार को आर्थिक रूप से तोड़ देती है। कई बार पशुपालकों को ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है ताकि वे नया पशु खरीद सकें।

मुख्यमंत्री कामधेनु/मंगला पशु बीमा योजना का उद्देश्य है। पशुपालकों को उनके अमूल्य पशुधन की सुरक्षा देना, पशु की असामयिक मृत्यु पर आर्थिक क्षतिपूर्ति देना, पशुपालन क्षेत्र को प्रोत्साहित करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करना।

किन पशुओं का और कितना बीमा होता है?

पशु का प्रकार अधिकतम पशु संख्या (प्रति परिवार) अधिकतम बीमा राशि
दुधारू गाय 2 (या 1 गाय + 1 भैंस) ₹40,000 प्रति पशु
दुधारू भैंस 2 (या 1 गाय + 1 भैंस) ₹40,000 प्रति पशु
बकरी 10 (एक कैटल यूनिट) निर्धारित यूनिट अनुसार
भेड़ 10 (एक कैटल यूनिट) निर्धारित यूनिट अनुसार
ऊंट (उष्ट्र वंशीय) 1 ₹40,000 प्रति पशु

महत्वपूर्ण: बीमा राशि पशु की नस्ल, उम्र और दुग्ध उत्पादन क्षमता के आधार पर तय होती है, लेकिन किसी भी स्थिति में यह ₹40,000 प्रति पशु से अधिक नहीं होगी। भेड़ एवं बकरी के लिए एक कैटल यूनिट में 10 पशु और दुधारू गाय/भैंस/ऊंट के लिए एक कैटल यूनिट में 1 पशु माना जाता है।

योजना के लाभ एवं विशेषताएं

✦  पूर्णतः निःशुल्क बीमा पशुपालक को कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ता, सरकार पूरा खर्च वहन करती है।

✦  गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट सभी प्रमुख पशुधन कवर।

✦  अधिकतम ₹40,000 प्रति पशु की बीमा राशि पशु की मृत्यु पर आर्थिक क्षतिपूर्ति।

✦  42 लाख पशुओं को कवर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य (2025-26)।

✦  केवल वही पशु पात्र जिनका पहले से किसी अन्य पशु बीमा योजना में बीमा न हो दोहरा लाभ नहीं।

✦  जन आधार कार्ड आधारित पंजीकरण सरल और डिजिटल प्रक्रिया।

✦  महंगाई राहत कैंप, प्रशासन गांवों के संग अभियान और प्रशासन शहरों के संग अभियान के माध्यम से मौके पर पंजीकरण।

✦  ऊंट संरक्षण विकास मिशन के साथ जोड़ाव ऊंट पालकों को प्रति वर्ष ₹20,000 अतिरिक्त सहायता।

पात्रता (Eligibility Criteria)

शर्त विवरण
निवास राजस्थान का स्थायी निवासी पशुपालक
जन आधार जन आधार कार्ड धारक होना अनिवार्य
पशु स्वामित्व पशुपालक के नाम पर पशु पंजीकृत होना चाहिए
पूर्व बीमा पशु का पहले से किसी अन्य पशु बीमा योजना में बीमा न हो
पशु स्वास्थ्य बीमा के समय पशु स्वस्थ होना चाहिए
अधिकतम पशु सीमा प्रति परिवार अधिकतम 2 दुधारू गाय/भैंस, 10 बकरी/भेड़, 1 ऊंट

आवश्यक दस्तावेज

✦  जन आधार कार्ड (अनिवार्य)

✦  आधार कार्ड

✦  मूल निवास प्रमाण पत्र

✦  पशु का टैग नंबर / पशु स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (पशु चिकित्सक द्वारा जारी)

✦  पशु की फोटो (टैग सहित)

✦  बैंक पासबुक (आधार सीडेड — क्लेम राशि हेतु)

✦  मोबाइल नंबर (OTP सत्यापन के लिए)

पंजीकरण प्रक्रिया – Step by Step

शिविर (Camp) के माध्यम से पंजीकरण:

यह योजना मुख्य रूप से सरकारी शिविरों के माध्यम से लागू होती है। इसलिए पंजीकरण के लिए इन शिविरों में उपस्थित होना जरूरी है:

✦  महंगाई राहत कैंप (Mehangai Rahat Camp)

✦  प्रशासन गांवों के संग अभियान

✦  प्रशासन शहरों के संग अभियान

Step 1: अपने क्षेत्र में आयोजित होने वाले उपरोक्त शिविर की तिथि और स्थान की जानकारी लें। यह ग्राम पंचायत/नगर निकाय से मिलती है।

Step 2: शिविर में जन आधार कार्ड और पशु से जुड़े दस्तावेज लेकर जाएं।

Step 3: शिविर में मौजूद पशुपालन विभाग के अधिकारी/कर्मचारी आपके पशु की जांच और टैगिंग करेंगे।

Step 4: पशु की जानकारी mmpby.rajasthan.gov.in पोर्टल पर दर्ज की जाएगी।

Step 5: बीमा पॉलिसी नंबर के साथ रसीद प्राप्त करें इसे सुरक्षित रखें।

ऑनलाइन जानकारी और स्टेटस:

Step 1: mmpby.rajasthan.gov.in पोर्टल पर जाएं।

Step 2: जन आधार नंबर या पशु टैग नंबर से बीमा स्टेटस चेक करें।

Step 3: बीमा पॉलिसी विवरण और वैधता अवधि देखें।

क्लेम (Claim) कैसे करें?

दुर्भाग्यवश यदि बीमित पशु की मृत्यु हो जाती है, तो क्लेम के लिए यह प्रक्रिया अपनाएं:

Step 1: पशु की मृत्यु होते ही तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय (Veterinary Hospital) को सूचित करें।

Step 2: पशु चिकित्सक से मृत्यु प्रमाण पत्र (Post-Mortem Report) बनवाएं यह क्लेम के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

Step 3: यदि दुर्घटना में मृत्यु हुई हो तो नजदीकी थाने में सूचना दर्ज कराएं।

Step 4: पशु टैग नंबर, बीमा पॉलिसी नंबर, मृत्यु प्रमाण पत्र सहित सभी दस्तावेज पशुपालन विभाग/बीमा कंपनी के पास जमा करें।

Step 5: सत्यापन के बाद बीमा राशि पशुपालक के आधार लिंक्ड बैंक खाते में जमा होगी।

अत्यंत महत्वपूर्ण: मृत्यु के तुरंत बाद सूचना देना अनिवार्य है। देरी से सूचना देने पर पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट न मिलने के कारण क्लेम अस्वीकृत हो सकता है। कई पशुपालकों को यह समस्या पहले आ चुकी है।

क्लेम रिजेक्ट होने के सामान्य कारण

✦  पशु की मृत्यु की सूचना समय पर न देना।

✦  पोस्टमार्टम/मेडिकल रिपोर्ट न होना।

✦  पशु का टैग/बीमा दस्तावेज उपलब्ध न होना।

✦  पशु पहले से किसी अन्य बीमा योजना में कवर होना (दोहरा बीमा अमान्य)।

✦  पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (बीमा के समय) उपलब्ध न होना।

कामधेनु से मंगला योजना तक क्या बदला?

विवरण कामधेनु योजना (2023) मंगला योजना (2024-25 से)
पात्र पशु केवल गाय-भैंस गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट
लक्ष्य (प्रथम चरण) सीमित संख्या 5-5 लाख गाय/भैंस/भेड़/बकरी + 1 लाख ऊंट
विस्तारित लक्ष्य (2025-26) लागू नहीं 10-10 लाख + 2 लाख ऊंट = 42 लाख पशु
बजट सीमित ₹400 करोड़ (प्रस्तावित)
अतिरिक्त सुविधा नहीं ऊंट संरक्षण मिशन — ₹20,000/वर्ष अतिरिक्त

ऊंट संरक्षण विकास मिशन विशेष जानकारी

राजस्थान का राज्य पशु ऊंट है और इसकी घटती संख्या को देखते हुए सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। मंगला पशु बीमा योजना के साथ-साथ ऊंट संरक्षण विकास मिशन के तहत ऊंट पालकों को प्रति वर्ष ₹20,000 की अतिरिक्त सहायता राशि दी जाती है। जिससे ऊंट पालन को प्रोत्साहन मिले और यह पारंपरिक व्यवसाय बचा रहे।

योजना की वर्तमान स्थिति एवं नवीनतम अपडेट 2026

✦  42 लाख पशु कवरेज लक्ष्य: 2025-26 बजट घोषणा (बिंदु संख्या-121) के अनुसार 10-10 लाख गाय, भैंस, भेड़, बकरी और 2 लाख ऊंट सहित कुल 42 लाख पशुओं का बीमा किया जाना है।

✦  21 लाख पशु 2024-25 में शामिल: इनमें से 21 लाख पशु वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही योजना में शामिल हो चुके हैं।

✦  10 जुलाई 2026 बजट: राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी द्वारा पेश बजट में किसानों और पशुपालकों के लिए अनेक सौगातें दी गईं मंगला पशु बीमा योजना का दायरा बरकरार।

✦  ₹400 करोड़ बजट: योजना पर कुल व्यय का प्रावधान निःशुल्क बीमा सुविधा जारी।

✦  शिविर आधारित पंजीकरण: महंगाई राहत कैंप, प्रशासन गांवों/शहरों के संग अभियान के जरिए पंजीकरण जारी।

✦  दोहरा बीमा नहीं: जिन पशुओं का पहले से किसी अन्य योजना में बीमा है, वे इस योजना में पात्र नहीं।

अन्य संबंधित राजस्थान योजनाएं

✦  मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना – कृषि दुर्घटना पर किसानों को ₹2 लाख तक सहायता

✦  मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना – किसानों को बिजली बिल पर ₹12,000 वार्षिक अनुदान

✦  राज किसान साथी पोर्टल एवं योजनाएं – सभी किसान योजनाओं की जानकारी एक जगह

✦  मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना – किसान परिवार को ₹25 लाख स्वास्थ्य बीमा

✦  सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना – वृद्ध किसान/पशुपालक को मासिक पेंशन

महत्वपूर्ण लिंक

विवरण जानकारी
आधिकारिक पोर्टल (मंगला योजना) mmpby.rajasthan.gov.in
पशुपालन विभाग animalhusbandry.rajasthan.gov.in
SSO Portal sso.rajasthan.gov.in
Jan Soochna Portal jansoochna.rajasthan.gov.in
हेल्पलाइन (Sampark) 181
विभाग पशुपालन विभाग, राजस्थान

FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना अब किस नाम से चल रही है?

मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना (2023) का दायरा बढ़ाते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 से इसे ‘मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना’ नाम दिया गया है। अब गाय-भैंस के अलावा भेड़, बकरी और ऊंट भी इसमें कवर होते हैं।

Q2. इस योजना में कितने पशुओं का बीमा होता है?

2025-26 के लक्ष्य के अनुसार 10-10 लाख गाय, भैंस, भेड़, बकरी और 2 लाख ऊंट सहित कुल 42 लाख पशुओं को बीमा कवरेज दिया जाना है।

Q3. बीमा राशि कितनी मिलती है?

पशु की नस्ल, उम्र और दुग्ध उत्पादन क्षमता के आधार पर बीमा राशि तय होती है, लेकिन यह अधिकतम ₹40,000 प्रति पशु से अधिक नहीं होगी।

Q4. क्या इस योजना के लिए प्रीमियम देना पड़ता है?

नहीं। यह पूर्णतः निःशुल्क योजना है। राज्य सरकार पूरा बीमा प्रीमियम स्वयं वहन करती है, पशुपालक को कोई शुल्क नहीं देना होता।

Q5. पंजीकरण कैसे और कहाँ होता है?

पंजीकरण मुख्य रूप से महंगाई राहत कैंप, प्रशासन गांवों के संग अभियान और प्रशासन शहरों के संग अभियान के माध्यम से होता है। इन शिविरों में जन आधार कार्ड के साथ उपस्थित होकर पशु की टैगिंग और पंजीकरण कराया जा सकता है।

Q6. एक परिवार अधिकतम कितने पशुओं का बीमा करा सकता है?

एक जन आधार कार्ड धारक पशुपालक अधिकतम 2 दुधारू गाय/भैंस (या 1 गाय+1 भैंस), 10 बकरी, 10 भेड़ और 1 ऊंट का निःशुल्क बीमा करा सकता है।

Q7. पशु की मृत्यु होने पर क्लेम कैसे करें?

पशु की मृत्यु होते ही तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय को सूचित करें और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनवाएं। दुर्घटना की स्थिति में पुलिस को भी सूचित करें। सभी दस्तावेज पशुपालन विभाग में जमा करने पर सत्यापन के बाद बीमा राशि बैंक खाते में आती है।

Q8. क्लेम अस्वीकृत क्यों हो सकता है?

सबसे सामान्य कारण हैं। मृत्यु की सूचना समय पर न देना, पोस्टमार्टम/मेडिकल रिपोर्ट न होना, या पशु पहले से किसी अन्य बीमा योजना में कवर होना।

Q9. क्या जिन पशुओं का पहले से बीमा है वे इस योजना में पात्र हैं?

नहीं। इस योजना के तहत केवल उन्हीं पशुओं का बीमा किया जाता है जिनका किसी अन्य पशु बीमा योजना के अंतर्गत बीमा न किया गया हो दोहरा बीमा मान्य नहीं है।

Q10. ऊंट पालकों के लिए कोई अतिरिक्त सुविधा है?

हाँ। मंगला पशु बीमा योजना के साथ-साथ राज्य में ऊंट संरक्षण विकास मिशन भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत ऊंट पालकों को प्रति वर्ष ₹20,000 की अतिरिक्त सहायता राशि दी जाती है।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री कामधेनु पशु बीमा योजना 2023 से शुरू होकर अब मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना 2026 के रूप में राजस्थान के लाखों पशुपालक परिवारों के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच बन चुकी है। 42 लाख पशुओं को कवर करने का लक्ष्य, निःशुल्क प्रीमियम और ₹40,000 तक की बीमा राशि यह सब मिलकर पशुपालकों को दुर्घटना और बीमारी के जोखिम से बचाते हैं।

यदि आप राजस्थान के पशुपालक हैं और अभी तक अपने पशुओं का बीमा नहीं कराया है, तो अपने क्षेत्र में आयोजित होने वाले महंगाई राहत कैंप या प्रशासन गांवों/शहरों के संग अभियान का इंतजार करें और जन आधार कार्ड के साथ पंजीकरण कराएं।

किसी भी जानकारी के लिए Sampark Helpline 181 पर संपर्क करें या mmpby.rajasthan.gov.in पर जाएं। RojgarPath.com पर राजस्थान सरकारी योजनाओं की नवीनतम जानकारी के लिए विजिट करते रहें।

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