परिचय
मुख्यमंत्री ऊँट प्रजनन / उष्ट्र संरक्षण योजना राजस्थान सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य राज्य में घटते ऊँटों (camel) की संख्या में वृद्धि करना और पारंपरिक ऊँट पालन व्यवसाय को बढ़ावा देना है। राजस्थान में ऊँट न केवल “रेगिस्तान का जहाज” कहलाते हैं बल्कि यह स्थानीय संस्कृति, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। राजस्थान में लगभग 85% भारत के ऊँट पाए जाते हैं और इन्हें राज्य पशु का दर्जा भी प्राप्त है।
हालांकि पिछले दशकों में ऊँटों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सरकार ने खास योजनाएँ लागू की हैं ताकि ऊँटों के प्रजनन को प्रोत्साहन मिले और ऊँट पालकों की आमदनी बेहतर हो। इसी उद्देश्य से ऊँट संरक्षण और प्रजनन को प्रोत्साहित करने वाली योजनाएँ राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं।
राजस्थान में यह योजना ऊँटपालकों को प्रोत्साहन राशि, पहचान पत्र, टैगिंग, और पंजीकरण जैसी सुविधाएँ प्रदान करती है ताकि ऊँट प्रजनन सुचारू रूप से हो और ऊँटों की आबादी में सुधार हो।
योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री ऊँट प्रजनन / उष्ट्र संरक्षण योजना के मुख्य उद्देश्य हैं:
- राजस्थान में घटती ऊँटों की संख्या को रोकना।
- पारंपरिक ऊँट पालन व्यवसाय को पुनर्जीवित करना और ऊँटपालकों को आर्थिक सहयोग देना।
- ऊँटों के स्वास्थ्य, प्रजनन और देखभाल के लिए उचित बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
- ऊँटों के टोडिया (बच्चा ऊँट) के जन्म को प्रोत्साहित करना और प्रजनन दर में वृद्धि करना।
योजना के प्रमुख लाभ
राजस्थान सरकार की इस योजना से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
✔ प्रोत्साहन राशि
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हर टोडिया (ऊँट का बच्चा) के जन्म पर ₹20,000/- तक की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
✔ दो किश्तों में भुगतान
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प्रोत्साहन राशि को दो भागों में बांटा जाता है — पहली किश्त टोडिया के जन्म के बाद, और दूसरी किश्त टोडिया के एक वर्ष का होने पर।
✔ पशुपालकों की आमदनी में वृद्धि
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सहायता राशि और उत्तम प्रजनन से ऊँटपालकों की आय में सुधार होता है।
✔ टैगिंग और पहचान
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ऊँटनी व उसके टोडिया का टैगिंग व पहचान पत्र जारी किया जाता है जिससे प्रजनन रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
✔ स्वास्थ्य सेवाएँ और शिविर
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ऊँटों के लिए रोग निदान, टीकाकरण और चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाते हैं।
पात्रता (Eligibility Criteria)
इस योजना के अंतर्गत लाभ पाने के लिए सामान्य पात्रता इस प्रकार है:
- आवेदक राजस्थान का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- ऊँटपालक के पास ऊँटनी (female camel) का वैध पंजीकरण और टैगिंग होना चाहिए।
- टोडिया (calf) की उम्र और पंजीकरण मानदंड योजना के नियमों के अनुसार पूर्ण होना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज
आवेदन प्रक्रिया के दौरान आम तौर पर ये दस्तावेज जरूरी होते हैं:
- आवेदक का आधार कार्ड / जन आधार कार्ड।
- ऊँटनी एवं टोडिया का पंजीकरण प्रमाण और टैगिंग विवरण।
- बैंक खाता विवरण (आईएफएससी, बैंक पासबुक/चेक का फोटो)।
- ऊँट व टोडिया की उम्र और जन्म तिथि का प्रमाण।
योजना के तहत मिलने वाली सहायता / राशि / लाभ
सरकार द्वारा ऊँट प्रजनन और संरक्षण के लिए प्रदत्त सहायता इस प्रकार है:
प्रोत्साहन राशि
-
₹20,000/- तक की प्रोत्साहन राशि ऊँटपालक को दी जाती है।
किश्त भुगतान
- पहली किश्त टोडिया के जन्म के बाद ₹10,000/-।
- दूसरी किश्त टोडिया के एक वर्ष का होने पर ₹10,000/-।
आवेदन प्रक्रिया (Online / Offline – Step by Step)
ऑनलाइन आवेदन
- राजस्थान पशुपालन विभाग की आधिकारिक पोर्टल पर जाएँ (Animal Husbandry Dept.).
- ऊँट प्रजनन / संरक्षण योजना का आवेदन फॉर्म भरें।
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- बैंक खाता और टैगिंग विवरण दर्ज करें।
- आवेदन जमा करें और पावती / रसीद सुरक्षित रखें।
ध्यान दें: कुछ मामलों में आवेदन ई-मित्र केंद्र या पशु चिकित्सालय के माध्यम से भी पूरा किया जा सकता है।
Latest Updates / Facts / Data (2026)
प्रोत्साहन राशि में वृद्धि: पहले की राशि ₹10,000 थी, जिसे अब ₹20,000 कर दिया गया है, जिससे ऊँटपालकों को अधिक आर्थिक सहयोग मिलेगा।
राजस्थान कैमेल कंज़र्वेशन मिशन: सरकार ने बजट 2024-25 में इसे मिशन मोड पर चलाने का निर्णय लिया, ताकि ऊँटों की घटती संख्या पर बेहतर निगरानी हो।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन: केंद्र सरकार भी ऊँट और गधे को इस योजनान्तर्गत शामिल कर पूंजीगत सब्सिडी दे रही है।
आधिकारिक वेबसाइट व हेल्पलाइन
राजस्थान पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Dept.) – https://animalhusbandry.rajasthan.gov.in/
स्थानीय पशुपालन विभाग कार्यालय से जानकारी एवं आवेदन सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)
1. मुख्यमंत्री ऊँट प्रजनन / उष्ट्र संरक्षण योजना क्या है?
यह राजस्थान सरकार की योजना है जिससे ऊँटों की घटती संख्या को रोकने और प्रजनन को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।
2. योजना का लाभ कौन ले सकता है?
केवल राजस्थान के स्थायी निवासी और पंजीकृत ऊँटपालक ही इसका लाभ उठा सकते हैं।
3. प्रोत्साहन राशि कितनी है?
हर टोडिया के जन्म पर कुल ₹20,000/- की सहायता दी जाती है।
4. राशि कैसे दी जाती है?
दो किश्तों में — जन्म के बाद और एक वर्ष के पूरा होने पर।
5. आवेदन कहाँ करना होगा?
पशुपालन विभाग की वेबसाइट या जिला पशु चिकित्सा कार्यालय से आवेदन कर सकते हैं।
6. योजना का उद्देश्य क्या है?
ऊँटों की संख्या में वृद्धि और पारंपरिक ऊँट पालन व्यवसाय को जारी रखना।
7. क्या टैगिंग आवश्यक है?
हाँ, योजना के लाभ के लिए ऊँटनी और टोडिया की टैगिंग अनिवार्य है।
